मरासिम तोड़कर
अब ज़मीं से आसमानों तक के रस्ते छोड़कर,
हम चले आये हैं तुमसे सब मरासिम तोड़कर,
चाह से और आह तक भी कर दिए हमने दफ़न,
चल नहीं सकते हैं हरगिज़ हम जहाँ की होड़ कर,
तुमने बस इतना कहा था,छुपके ही मिलना कभी,
तुमको देखा ही नहीं फिर आँख अपनी मोड़ कर
हम कलेजा साफ़ रख कर ही अबस तुमसे मिले,
तुम हमेशा खुश रहे हो इसकी,उससे जोड़ कर .....
वक़्त ही तो है कभी ....उल्टा अगर ये हो गया,
बैठ कर रोया करोगे,सर ख़ुद अपना फोड़ कर...
#उर्मिलामाधव ...
22.4.2015
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