कहां से लाएंगे

मुर्दे हैं, जज़्बात कहाँ से लाएंगे,
फ़िर बीते लमहात कहाँ से लाएंगे,

ख़ाक हो गए वीराने में जलके जो,
रंग रंगीली, रात कहाँ से लाएंगे,

ख़ुश्क हो गए, आंसू जिनकी आंखों में,
ख़ुशियों की बरसात कहाँ से लाएंगे,

कभी हुजूमे मेहमाँ था इस आंगन में,
फिर से वो सौगात कहाँ से लाएंगे,
उल्फ़त की इफ़रात कहाँ से लाएंगे,

जड़े हुए थे चांद सितारे चूनर में,
वो जगमग, बारात कहाँ से लाएंगे,

तुम अपनी मीज़ान पे रखके मत तौलो,
घातों के इलमात कहाँ से लाएंगे,
उर्मिला माधव,
5.4.2019

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