जानते नहीं हम

किसका वक़ार क्या है,ये जानते नहीं हम,
आखिर जवाब क्या है,क्यूँ ठानते नहीं हम??

किसकी है कारसाज़ी,खारिज़ हैं सब इरादे,
वहम-ओ-सराब क्या है,पहचानते नहीं हम, 

कितनी है जिंदगानी,इसको भरम रखा है,
इसका हिसाब क्या है,कुछ जानते नहीं हम,

गहराई नापते  हैं,कमसिन जवानियों की,
हुस्न-ओ-शबाब क्या है!!क्यूँ मानते नहीं हम,

लम्बी ज़बान करके,थूका किये सभी को,
इसमें खराब क्या है,ये छानते नहीं हम....
उर्मिला माधव ...
9.4.2014...

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