ईमान से
सह्ल होकर हम मिले थे, आज के इनसान से,
खौफ़ से पीछे हटे हम, सच है ये, ईमान से,
अपना सच हाथों में लेकर, मर गए कितने शफ़ी,
झूठ की बुनियाद के परचम खड़े हैं, शान से,
ख़त्म होती ही नहीं,कितनी बड़ी तन्हाई है,
ताकते रहते हैं दुनिया, हम महज़ नादान से,
उर्मिला माधव
14.4.2019
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