ख़ुदा ख़ुदा करके

जिस्म जां रूह सब जुदा करके,
सो गए रस्म हम अदा करके,

बोझ था, दिल पे कुछ ख़यालों का,
नींद टूटी, ख़ुदा-ख़ुदा कर के,
उर्मिला माधव

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