बंदापरवर है तू
तू है बन्दानवाज़ बन्दापरवर है तू,
बात रखले मेरी पास-ए-मंज़र है तू,
मेरी राहों को थोड़ा तो आसान कर,
मैं हूँ मुश्किलज़दा, न सितमग़र है तू,
चश्म-ए-गिरया गुज़ारिश में पैवस्त हैं,
मैं इक इन्सान हूँ और पयम्बर है तू,
तेरी कारीगरी क्या बयाँ कर सकूँ ?
मैं लिखावट हूँ बस और सुखनवर है तू,
अपने दिल से लगाले इस नाचीज़ को,
कर निगाहे क़रम एक सिकन्दर है तू...
उर्मिला माधव..
18.3.2016
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