अच्छी ख़ासी है
एक ग़ज़ल हाज़िर है ...
क्यूँ ये दिल में अजब उदासी है?
मुझमें हिम्मत तो अच्छी ख़ासी है,
कैसे शिद्दत में कुछ कमी आई ?
रूह तो अब तलक भी प्यासी है,
ख़ूब लंबी है ज़िन्दगानी भी,
लोग कहते हैं ये ज़रा सी है,
एक अरसा है,एक लम्हा भी,
इसकी बस बानगी हवा सी है,
राह क्या देखना मसर्रत की?
गो के सदियों से ग़म शनासी है....
उर्मिला माधव। .....
9 .3 .2017
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