परस्तार हुए
ऐसी नज़रों के परस्तार हुए,
जिस्मों जाँ दोनों तार-तार हुए,
आज दिल ये सवाल करता है,
बे सबब ऐसे क्यूँ निसार हुए,
फूल बन कर क़रीब आए थे,
दूर जाके वो कैसे ख़ार हुए,
लोग कहते हैं तजुर्बा अक्सर,
नादाँ दिल ना किसीके यार हुए।।
उर्मिला माधव..
6.3.2013
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