मज़ाहिया
दिल पै मत ले यार-----
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जो चाहो तरकीब निकालो,
किसी तरह दिल को बहला लो,
अगर कोई कन्या मिल जाए,
उसको बातों से फुसला लो,
भले शेर चाहे जिसका हो,
अपने नाम से उसको डालो,
फिर देखो तुम रंग इश्क़ का,
जिसको चाहो उसे फंसा लो,
जब तक चले चलाओ उसको,
फिर दूजा रस्ता अपना लो ,
नए सिरे से क्रम दोहरा लो,
अपनी ढपली आप बजालो...
उर्मिला माधव...
19.3.2014...
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