ज्योतिर्गमय
पंछी खोजते हैं
हरे जंगल,
पानी के स्रोत,
हरे तिनके,
रिमझिम बरसात,
छोटे छोटे पानी में स्नान,
किलोल करते हुए पंछी
लेकिन कैसे?
वृक्षों की नियति कट जाना,
मनुष्यता से गिरना ही
आधार है विनाश का,
प्यास से मरते हुए
छोटे से प्राणी,
सूखी हुई धरती,
तेज़ हवाएं,
सूखे पत्तों की चरमराहट,
पक्षियों का भय बनी हुई,
क्या है अंतर, श्मशान और
साधरण जन जीवन
एक सा ही तो है,
म्रत्यु पर्यंत आपा धापी,
और सब समाप्त ...
काश कोई सत्य की ओर लेजाता,
तमसो मा ज्योर्तिगमय:
उर्मिला माधव
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