कसम से
हमको लगता है कि तुम एक चाँद हो,
चाँद ही तो दूर रहता है सनम से
सच, कसम से,
चांदनी आती है मेरे घर के दर तक,
तुम कहीं आजाओ तो मर जाएँ धम से
सच, कसम से,
शर्म की पाजेब पांवों में है मेरे
हो सके तो आके तुम मिल जाओ हमसे
सच, कसम से,
एक दिन दुनियां से हम उठ जायेंगे बस,
बाद उसके रोओगे तुम दर्द-ओ-ग़म से
सच कसम से,
वो तुम्हारे आंसुओं से कम रहेगी,
जो सहन में होगी बारिश,खूब,झम से
सच कसम से,
अब भी तुम आ जाओ अब भी वक़्त है,
सांस रुक जायेगी इक दिन एकदम से
सच,कसम से,
उर्मिला माधव...
16.3.2016
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