ग़म अभी हैं

तुमने चाहा हम न हों पर हम अभी हैं,
हमने चाहा ग़म न हों पर ग़म अभी हैं,

जाने कब से अपनी थी बस इक तमन्ना,
अब ये पलकें नम न हों पर नम अभी हैं,

इक गुज़ारिश है हमारी धड़कनों की,
बस हवाएं कम न हों पर कम अभी हैं...
उर्मिला माधव
15.3.2018

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