संभल पाया नहीं

क्या किया जाता अगर ये दिल संभल पाया नहीं,
रूह पर लिख्खा हुआ कुछ भी बदल पाया नहीं,

टूट कर ये जिस्म-ओ-जां, लडखडाते रह गए,
उसपे फिर ये दर्द -ए-दिल कुछ निकल पाया नहीं,
Urmila MadhavMadhav
20.3.2016

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