क्या करूं

दश्त जब हो ही गया मेरा कलेजा क्या करूँ,
वहशतें या हसरतें जो भी हैं लेजा, क्या करूँ ,

दिल हथेली पै रखा और साथ में इक ख़त दिया,
कुछ नहीं बाकी बचा है क्यों ये भेजा, क्या करूँ,

हर घड़ी हलकान रहना और न सोना रात भर,
और जो तनहाई दी थी,वो भी है ,जा क्या करूँ,

उर्मिला माधव...
12.3.2015..

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