कब हुई हमसे

हम अना को न छोड़ पाए कभी,
जब भी दुनिया अलग हुई हमसे,
हमने पर्दा दुई का रहने दिया,
कोई ख़िदमत भी कब हुई हमसे
उर्मिला माधव

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