बेटी की सूरत
क्यूँ मुझे बेटी की सूरत बख्श दी,
दूसरों के घर को जब अपना कहा,
पूछ तो लेते के दिल का क्या हुआ ?
आपके खूंटे की गैय्या थी ज़रूर,
पर कहो इसमें कहाँ मेरा कसूर?
किसलिए मुझको किया नज़रों से दूर?
एक कोना भी न था मेरे लिए,
रोते-रोते आग के फेरे लिए
जाने किस पल आँख मेरी लग गई
अजनबी से दर पै डोली रख गई,
उर्मिला माधव...
19.2.2015
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