चिलमन

मैं अश्कबर हूँ न कोई देखे,
यूँ रुख पे चिलमन गिराई हमने,
न कोई आहों का दर्द जाने,
यूँ बात हँसके छुपाई हमने।

हमें मुहब्बत थी आँधियों से,
तो कैसे तूफ़ाँ से बच निकलते,
कि अपने जज़्बे पै धूल रखके,
ये शम्मे महफ़िल सजाई हमने।

वो संगदिल थे ये मेरी किस्मत,
तो फ़िर ज़माने को क्या बताते,
क्यूँ रो रहे हैं यूँ दिल ही दिल में,
ये बात सबसे छुपाई हमने ।।.....
उर्मिला माधव..
28.2.2013

Comments

Popular posts from this blog

गरां दिल पे गुज़रा है गुज़रा ज़माना

kab chal paoge