मुकर जाए

एक बार फिर...
---------------
वो जो रह-रहके चोट कर जाए,
अपने अलफ़ाज़ से..मुकर जाए,

आशिक़ी,इश्क एक फजीहत है,
जिसको रोना हो वो इधर जाए,

दर्द से दिल नहीं मुक़ाबिल हो,
खैरियत से ही अब गुज़र जाए,

मुझको हंसने को इक बहाना दे,
ज़िन्दगी...जाने कब ठहर जाए,

ज़ीस्त को जब भी ऐसी ख्वाहिश हो,
इतनी तौफीक़ दे.......कि मर जाए,
उर्मिला माधव...
६.१०.२०१३..

Comments

Popular posts from this blog

गरां दिल पे गुज़रा है गुज़रा ज़माना

kab chal paoge