कौन मेरे साथ है
सोचती हूँ दिन है या के रात है,
बेक़सी में ....कौन मेरे साथ है,
सिर्फ तन्हाई,मुख़ालिफ़ मंजिलें,
उम्र भर को बस यही सौगात है,
एक मुक़म्मल तीरगी मेरे तईं,
रौशनी हंसती है, अच्छी बात है !!
लोग सब मुश्ताक़ हो देखा किये,
चश्म-ए-गिरियाँ है कि ये बरसात है ??
मुंतज़िर हूँ साज़-ओ-सामां,बांधके,
ज़िन्दगी हर पल क़ज़ा के हाथ है....
#उर्मिला
11.2.2015
मुश्ताक--- उत्सुक
चश्म-ए-गिरियाँ--- आँख के आंसू
तीरगी--- अँधेरा
मुन्तजिर---- प्रतीक्षित
Comments
Post a Comment