गहराइयां

ज़िन्दगी समझी नहीं कुछ ..वक़्त की गहराइयाँ, 
और हम गिनते रहे,.....अपनी फ़क़त तन्हाईयाँ, 
क़त्ल हमकोे कर दिया,मुतलक़ बिना तलवार के 
ज़ह्र सी लगती रहीं यूँ.......... शह्र की पुरवाइयां..।
 #उर्मिलामाधव.. 
17.2.2016

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