आसान हूँ

सब समझते हैं बहुत आसान हूँ,
जैसे मैं दिलजोई का सामान हूँ,

दिल्लगी करते हैं मुझसे बेसबब,
बेरुख़ी का मैं अजब उन्वान हूँ,

मेरी जानिब से सभी आज़ाद हैं,
मैं तो अपने आप में ज़िंदान हूँ,

मेरा अपना आशियाँ आबाद है
मैं ही सदियों से बहुत वीरान हूँ,

ये समझ कर भूल मत करना कभी,
तुर्शी-ए-अहबाब से ...हलकान हूँ,

लोग मिलते हैं तो हंस देती हूँ बस,
पर किसी हरक़त से कब अनजान हूँ...
उर्मिला माधव..
2.3.2017

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