सकते थे

हम गए वक़्त की तस्वीर बना सकते थे,
उसको हाथों पे लिए ,बाम पे जा सकते थे,

ख़ुद धुँआँ घुट गया ऑ घुट गए दीवार -ओ-दर,
जितनी तन्हाइयाँ थीं काम में ला सकते थे..
उर्मिला माधव

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