गश खाओगे

ज़िन्दगी के ख़म अभी देखे कहाँ,
इक ज़रा टकराओगे गश खाओगे,

जितने भी हम बच गए हैं ख़ूब हैं,
तुम क़यामत देख कर डर जाओगे,

गो कि तूफ़ानों की रंगत देख कर,
दस दफ़ा चकराओगे, बल खाओगे,

जुम्मा-जुम्मा आठ दिन के हो मियां,
हम तलक पहुंचे भी तो मर जाओगे
उर्मिला माधव

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