ख़ासमख़ास तक

तीन शेर---
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आज ये ज़ाहिर हुआ है यक-ब-यक,
साथ भी देगी नहीं जब सांस तक ,

राब्ते अब तक रहे जो राह से,
क्या चलेंगे आख़री एहसास तक ??
 
कोई भी यकता नहीं इस खेल में,
हो गए ख़ामोश ख़ासम ख़ास तक.....
उर्मिला माधव...
28.2.2014.

यकता---अद्वितीय 
राबता---सम्बन्ध

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