देखने का चाव
दुनियाँ कैसे चले मुझे देखने का चाव||
एक नदी में जितने धारे,
बीच भंवर से करें इशारे,
पार चले तो सुनले प्यारे,
तू भी आजा साथ हमारे,
दुनिया कैसे चले मुझे देखने का चाव||
जो डूबा है उसने पाया,
तट पर जो है पहुँच न पाया,
सतगुरु ने ये ज्ञान बताया,
दास कबीर ने ये ही गाया,
दुनिया कैसे चले मुझे देखने का चाव||
उर्मिला माधव...
18.2.2014....
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