हो सकता था

दामन मेरा तार तार भी हो सकता था,
मेरे ग़म पर आबशार भी रो सकता था,

अच्छा ही है,रब ने मुझे बचाया आख़िर,
यही तमाशा बार-बार भी हो सकता था,

थोड़े कुछ एहसास बचे हैं अच्छा है,
वर्ना ये दिल ऐतबार भी खो सकता था,
उर्मिला माधव,
16.2.2015

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