डर गए सब

अपने-अपने दायरों में मर गए सब,
दूसरा कोई आगया तो डर गए सब,

सहर होते ही मिले एक दूसरे से,
शाम होते अपने-अपने घर गए सब,

मुश्किलों के वक़्त सब दरकार थे,
कोई भी जाना न चाहे,पर गए सब,
उर्मिला माधव..
13.1.2017

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