ख़ामोश सी फिजाएं

खामोश सी फ़िज़ाएँ,
सहमी हुई हवाएँ,
सब हमसे पूछती थीं,
कहदो कहाँ से जाएँ?
अनजान से अँधेरे,
सब रास्तों को घेरे,
आँसू से भीगे चेहरे,
रोते हुए सवेरे,
क्या हमपे बीतती थी??
किस-किसको ये बताएं??
हर बात चुक गई थी,
ख़ाली गईं दुआएँ ।।
उर्मिला माधव..
11.1.2014..

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