मुग़ालते हैं

कोइ साथ चल सकेगा,वो भी मुग़ालते हैं
यादों के सिलसिले हैं,वो भी खंगालते हैं,

सूखे शजर के पत्ते,गिरते हैं ख़ुद ब ख़ुद ही,
दिल जो धड़क रहा है,वो भी संभालते हैं ,
उर्मिला माधव

Comments

Popular posts from this blog

गरां दिल पे गुज़रा है गुज़रा ज़माना

kab chal paoge