कर लीजिए

ज़िन्दगी के वास्ते कुछ इस तरहा कर लीजिये,
रंज-ओ-ग़म जो भी मिले सब मुस्कुरा कर लीजिये,

ग़ैर पर उंगली उठाने से तो बेहतर है यही,
अपनी कारस्तानियों पर तब्सरा कर लीजिये,

दिल हथेली पर मसल कर, सूँघिये तो बरमला,
बरसरे महफ़िल दुआ का हौसला कर लीजिये,

बात कहना और मुकरना है ज़माने का चलन
ख़ूबियों में खामियों का सिलसिला कर लीजिये
उर्मिला माधव

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