ख़ास रखते हैं
हम जो रिश्तों की आस रखते हैं,
यूँ ही उम्मीद ख़ास रखते हैं ,
जब ये दुनिया बदल गयी है तो,
बे-वज्ह दिल उदास रखते हैं,
जिनको बस दायरों से निस्बत है,
खुद को ही आस पास रखते हैं,
वो जो इंसां की कद्र करते हैं ,
कितना सादा लिबास रखते हैं,
कुछ तो ऐसे भी हैं जिगर वाले,
सबकी खातिर मिठास रखते हैं,
उर्मिला माधव...
14.1.2016
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