होश पर

सर तो ये रख्खा गया है दोष पर,
किस लिए छीना गया है होश पर,

क्या लगाया इसके भीतर राम जी,
जाने क्या-क्या सोचता है जोश पर,

दायरों की करके कुल मट्टी पलीद,
ज़िक्र भी छेड़ा गया मयनोश पर,
उर्मिला माधव

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