पनाहों में

ग़ज़ब दीवानगी है ये,मुहब्बत की पनाहों में,
छलकने ही नहीं पाया ज़रा भी दर्द आहों में.

बहुत रूपोश रख्खा था ज़माने भर की नज़रों से,
जो दिल में दर्द रहता था उभर आया निगाहों में,

हम अपना हाथ पेशानी पे रख के सोचते हैं अब,
ज़माना हो गया हमको गए, दिलबर की बांहों में
उर्मिला माधव

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