चमन की ख़ुश्बू
दिल को भाती है बहुत,गुल-ओ-चमन की खुश्बू
सबसे आला है मगर पाक़ ज़ेहन की ख़ुशबू
ये जुबां कुछ भी कहे,साफ़ नज़र आता है,
सबकी चाहत है फ़क़त,चैन-ओ-अमन की खुश्बू,
वो मिला आज मुझे,यूँ ही अबस कहने लगा,
याद क्यूँ आने लगी ख़ाक -ए- वतन की खुश्बू,
ये मुहब्बत है मगर इतना समझना है तुझे,
तुझसे आती है मुझे ख़ास बहन की खुश्बू ,
वो फसीलें भी सजाई जो कभी ख़ुद मैंने,
और वो रेहान,वो घर के सहन की खुश्बू,
होके काफ़ूर,है उड़ जाए,मुहब्बत की फ़ज़ा,
शाही दस्तार से ग़र आये कफ़न की खुश्बू.....
#उर्मिलामाधव...
10.12.2016..
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