हर नफ़स

जा तुझे अय ज़िन्दगी अब हर नफ़स ठुकरा दिया,
अपने हाथों हमने अपने वक़्त को चलता किया,

हर क़दम पर आबलों के नाम लिख्खे हैं अभी,
ज़ेह्न से एक आह निकली उसमें सब दफना दिया,

ख़ुद तमाशा कर दिया,लो हमने अपनी मौत को
कुछ दयानतदार आये,रूह को क़फ़ना दिया,

जिस शनासाई का दावा हर क़दम करते थे हम,
उन मोअज़्ज़िज़ दोस्तों ने,दोस्त को रुसवा किया...
उर्मिला माधव

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