रखते हैं क़दम

जो अहले ज़र्फ़ हैं वो सोच के रखते हैं क़दम,
वगरना हैफ़ से इनसान को तकते हैं क़दम,

अभी भी वक़्त है इनसान ख़ुद संभल जाए,
कभी तो राह में हर हाल में थकते हैं क़दम...
उर्मिला माधव
11.12.2017

Comments

Popular posts from this blog

गरां दिल पे गुज़रा है गुज़रा ज़माना

kab chal paoge