चलना पड़ा अगर

चल पाएंगे कहाँ तक, चलना पड़ा अगर,
रस्ते में अपने पांव को मलना पड़ा अगर ?

हिम्मत तो कर गए हैं पै फ़िर भी डर है ये,
सूरज से पहले हमको, ढलना पड़ा अगर?

इक दश्त से गुज़रना पड़ जाएगा हमें जब,
शोलों की सुर्ख़ आग पे जलना पड़ा अगर?

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