नज़्म एक जुगनू

एक जुगनू था,शह्र अनजान था,
उसको उड़ना था मगर हलकान था,
किस जगह पर सांस ले,बैठे कहाँ,
और क़दम बोसी करे,किसकी कहाँ,
फिर भी आख़िर वो क़दम भी चुन लिए,
जिनमें अपने ख़्वाब जाकर बुन लिए,
उर्मिला माधव

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