बिस्मिल मुझे
इस क़दर माज़ूर मत रख,ऐ दिले बिस्मिल मुझे
ज़िन्दगी से दूर मत रख,ख़ालिके आदिल मुझे,
ठोकरों के साथ चलना एक दीगर बात है,
उम्र भर मजदूर मत रख दे भी दे मंजिल मुझे,
दे दिया साग़र-ऑ मीना,और आज़ादी भी दी,
होश दे मखमूर मत रख,गर दिया ये दिल मुझे,
ये मुक़म्मल बेख़ुदी और दिल भी ज़िद पै आगया,
इतना भी मजबूर मत रख,हाशिये महफ़िल मुझे,
उर्मिला माधव...
1.1.2015...
माजूर--- विवश
मखमूर--- नशे में
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