रातें उधार लेकर
एक मतला ---2 शेर..
आँखों में जागता है,रातें उधार लेकर,
सहरा को नापता है,आँखें उधार लेकर,
दस्तार में छुपी है,शायद वो अक़्ल होगी,
दुनियां को आंकता है,बातें उधार लेकर,
खोया हुआ है इंसां, फितरत की तीरगी में,
हर-हर में झांकता है,साँसें उधार लेकर.....
उर्मिला माधव,
13.12.2016
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