फ़ासला नहीं है

मैं ज़मीन पर खड़ी हूँ, किसी आसमान जैसी,
ये वो फ़र्क़ है कि जिसमें कोई फ़ासला नहीं है

मैं जहां से देखती हूँ, वहां आ सका न कोई,
ये वो जुरअतें है जिनका, तुम्हें हौसला नहीं है,
उर्मिला माधव

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