तसवीर है
जो तुम्हारी ख़ास एक तस्वीर है,
वो मेरे दिल की अजब ज़ंजीर है,
वो मुझे अपनी सी लगती है सुनो,
उसकी सीरत इन्तेहाई शीर है,
बिन तुम्हारे दिल बहुत बेचैन था,
ये महज़ बिछड़े दिनों की पीर है,
रात दिन बाबत तुम्हारे सोचना,
क्यूँ मेरे दिल पै रखी शमशीर है,
लौट कर आना तो उनको है नहीं,
तयशुदा है बस यही तक़दीर है,...
उर्मिला माधव...
18.11.2015
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