करते हैं हम
एक मतला दो शेर---
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बे-वज्ह इस ज़ीस्त पर क्यूँ हर क़रम करते हैं हम !!
मरके जीने के इलावा........और क्या करते हैं हम ??
चश्म-ए-गिरियाँ,टूटते दिल,और फ़क़त,तन्हाइयां,
दर्द पीने के इलावा..........और क्या करते हैं हम ??
चाक़ दामन,हाल खस्ता........और कुछ पैबंद बस ,
ज़ख्म सीने के इलावा.......और क्या करते हैं हम ??
उर्मिला माधव...
19.11.2014...
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