साथ और राहें
तुम्हारा साथ और ये राहें,
मैं अकेली हो गई थी,
तुम्हारी सहेली हो गई थी,
ये रास्ते के दरख़्त
ये चाँद सितारे
ये सभी हैं मेरे सहारे
इन्हें कोई कितना भी पुकारे
ये हमेशा ही एक जैसे हैं
सब के हैं
किसी एक के नहीं
दुनियां के हर इक सच को
बताना ज़रूरी नहीं होता
समझती थी मैं सभी कुछ
बिना बताये
मेरे दिल-ओ-दिमाग़ पर
धुंध कभी नहीं छाई
बिना तुम्हारे कहे भी
हर बात समझ में आई
जाने कब से अहसास था
तुम्हारे खोने का
मैंने चलन ही नहीं सीखा
कभी भी रोने का
दामन भिगोने का
तेज़ आँधियाँ चलना सिखाती हैं
संभलना सिखाती हैं
#उर्मिलामाधव
3.11.2015
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