बतानी पड़ेगी
हक़ीक़त हमें अब बतानी पड़ेगी,
तुम्हें ग़म से बाज़ी लगानी पड़ेगी,
तुम्हें याद होगा, कभी हम मिले थे,
वही बात तुमको भुलानी पड़ेगी,
कहाँ तक तअक़्क़ुब में फिरते रहेंगे
तबीयत सभी से हटानी पड़ेगी,
समझ में ज़माना भी आने लगेगा,
फ़क़त नौहाख्वानी सिखानी पड़ेगी,
रहेंगे ये खांचे तो महफ़ूज़ लेकिन,
कहानी ....घटानी-बढ़ानी पड़ेगी,
मिरा साथ तुमको कहाँ तक मिलेगा ?
बख़ुद ज़िन्दगानी ....चलानी पड़ेगी,
उर्मिला माधव..
30.11.2016
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