चलन देखते हैं

अजब ज़िन्दगी का चलन देखते हैं,
न दिल मैं किसीके अमन देखते हैं, 

करी फिक्र गैरों की ता उम्र जिसने वो.
मुश्किल से ग़ोर-ओ-कफन देखते है,

जिन्होंने खड़ी कीं,वफ़ा की मिसालें,
वो उल्फत का उजड़ा चमन देखते हैं,

जिन्हें हो फ़क़त दुश्मनी से ही निस्बत ,
वो इनसान का कब......ज़ेहन देखते हैं?

जहां लोग इल्म-ओ-अदब से चले हों,
वहां ज़िन्दगी तक......रहन देखते हैं...
उर्मिला माधव...
६.११.२०१३...

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