मुक़द्दर

कटी कोई दार पै गरदन मुक़द्दर कह दिया उसको,
ज़ुबां खोले अगर कोई तो बदतर कह दिया उसको,

हुआ क्या है अदीबों को हक़ीक़त क्यों नहीं लिखते,
हुआ गद्दी नशीं कोई ,सिकंदर कह दिया उसको

मुलाज़िम है,कोई जाहिल,अगर ऊंचे महकमे का
अना दिल में दबा ली ख़ूब बेहतर कह दिया उसको,
उर्मिला माधव

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