लिखा जाए

उसने चाहा था वो लिखा जाये,
इससे बेहतर है ....मर्सिया गाये

दिल मगर इन्तिख़ाब करता है
अब किसीसे न कुछ कहा जाये

झूठ से पुर असर तबस्सुम क्या,
इब्न-ए-आदम पै हर गिला जाए,

किसकी अब बानगी तलाशे दिल,
ख़ाक़ दरिया में जब बहा आये,

अब ये तबियत कहीं नहीं लगती,
इस तरह कब तलक चला जाए,

अपनी मुठ्ठी में ख़ाक़ रखते हैं,
ज़िन्दगी तुझसे क्या मिला जाए..
#उर्मिलामाधव
11.10.2015

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