खेल वाले हैं--हज़ल
लोग तो कितने ऊंचे-ऊंचे खेल वाले हैं,
हम हैं गंगू तेली,ख़ालिस तेल वाले हैं,
रोज़ दुहाई देते है वो हम हैं तनहा,तनहा,
मगर हंसीं लोगों से ख़ासे, मेल वाले हैं,
इनका चक्कर रोज़ जबलपुर,दिल्ली लगता,
अपना क्या है,अपन चने की ठेल वाले हैं,
जबसे पैदा हुए वो तबसे सारा कुछ पढ़ डाला,
अपने हाथ में सभी नतीजे,फेल वाले हैं,
बहुत बिज़ी हैं मिलने का भी वक़्त न इनको
मगर हंसीं लोगों के दिल की जेल वाले हैं...
उर्मिला माधव..
29.10.2916
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