दोस्त मालूम नहीं-- फ्री वर्स
दोस्त कहाँ होते हैं मालूम नहीं,
दुःख को दुःख की तरह समझने वाले
कहाँ होते हैं
जो प्यार के अहसास को
निर्भरता का नाम नहीं देते
कहाँ होते हैं ऐसे लोग
मालूम नहीं
बरसों पहले किसीके
मुंह से ये लफ़्ज़ पहली बार सुना था
ब्रीदिंग स्पेस...
जिससे कहा गया
उसने भोलेपन में समझा ही नहीं
मेरे लिए भी नया था
लेकिन आज मैं इसके मानी
ख़ूब जानती हूँ
इसे दामन छुड़ाना कहते हैं
अंग्रेजी है ये
हमारी समझ से दूर
ऐसे घुमावदार लफ़्ज़ अच्छे नहीं
सच और साफ कह देना
ज़ियादा ठीक था
मुझे अगर ये लफ़्ज़ जब भी
सुनना ही पड़ जायेगा
प्रीफर करुँगी भूलना उम्र भर का
ऐसे अल्फ़ाज़ रिश्तों के मज़ाक उड़ाते
से लगते हैं
यानि घुटन कोई क्यों बर्दाश्त करे
बेहतर हो....
चलो एक बार फिर से अजनबी बन जांय
क्योंकि मुझे ख़ामोशी
फूलों जैसी नहीं लगती
चिकनी बातें करना
मुझे नहीं आता,कभी आया भी नहीं
और आना भी नहीं है
अच्छा है बहुत ये
एकला चालो रे...
#उर्मिलामाधव
16.10.2015
Comments
Post a Comment